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टेलीमेडिसिन का भविष्य कैसा दिखता है?
भविष्य के- सुदूर

यह बिना किसी संदेह के चला जाता है कि भारत के स्वास्थ्य सेवा उद्योग में टेलीमेडिसिन तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न परिदृश्य, भौगोलिक और भौगोलिक कारकों के कारण भारत के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में नवाचार काफी जटिल है। टेलीमेडिसिन प्रौद्योगिकी में इन नवाचारों का सबसे अच्छा उदाहरण है। यह ग्रामीण समुदायों में दूरी के कारण आने वाले नैदानिक ​​मुद्दों को हल करने में मदद करता है। टेलीमेडिसिन मरीजों की प्रतीक्षा और यात्रा का समय बचाता है, जब यह अपने स्थान पर डॉक्टर से परामर्श करने की बात करता है।


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भारत में पिछले कुछ वर्षों में टेलीमेडिसिन ने एक लंबा सफर तय किया है। परामर्श के लिए इसे एक नया रास्ता मिल गया है। यह तकनीक हर बार विकास की बड़ी गुंजाइश के साथ बढ़ रही है। यह चिकित्सा क्षेत्र में एक नए क्षेत्र के रूप में सामने आया है। वर्ष 2020 कई कारणों से टेलीमेडिसिन के लिए एक सफल वर्ष होने जा रहा है। स्वास्थ्य डेटा विभिन्न तरीकों से एक बड़ी मदद के रूप में सामने आया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शानदार तरीकों में से एक है। यह भविष्य में चिकित्सा मुद्दों की पहचान करने में मदद करेगा। कुछ चिकित्सा आपात स्थिति जैसे हृदय की विफलता, अस्थमा के दौरे और मधुमेह को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) उपकरणों का उपयोग करके ट्रैक किया जा सकता है।


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टेलीमेडिसिन ग्रामीण गांवों में चिकित्सा सुधार के लिए एक खाका की तरह है। NITI Aayog के अनुसार, भारत के हेल्थकेयर सिस्टम को एक नया वर्चुअल प्लेटफ़ॉर्म नेशनल हेल्थ स्टैक (NHS) मिला है। ई-हेल्थ और टेलीमेडिसिन को सभी के लिए आसानी से सुलभ बनाने के लिए वर्ष 2022 तक डिजिटल रूप से सभी नागरिकों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखने का लक्ष्य है।


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